केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड कर परीक्षाएं
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Saturday, March 31, 2018
Thursday, March 15, 2018
Monday, March 12, 2018
स्पॉट इवैल्यूएशन सम्बंधित केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा जरी पत्र |
केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड द्वारा जारी पत्र
Tuesday, March 06, 2018
Tuesday, February 27, 2018
Monday, February 05, 2018
संवाद
प्रिय मित्रों,
आज दिनाँक 05/02/2018 को जब आपसे मिल रहा हूँ तो कुछ बिंदु आपसी संवाद हेतु।
1.सेवानिवृत्त शिक्षकों का वेतन-ये अत्यंत दुःख और दुर्भाग्य का विषय है कि सेवानिवृत्त शिक्षकों को समय से वेतन तक मिलने के लाले पड़ रहे है।उन्हें अभी तक 7वे वेतन आयोग का लाभ नही मिला है पर वेतन समय पर मिलना उनके जीवन के इस पड़ाव पर उनके आत्म सम्मान और सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है,इसे ध्यान दिया जाना चाहिए और सुनिश्चित किया जाना चाहिए।
2.केंद्रीय विद्यालय संगठन के समरेटिव असेसमेंट-विगत दिनों cbse ने बच्चों के हितों हेतु संवैधानिक संस्था के हस्तक्षेप के बाद कक्षा 6 से 8वी तक के नियम के लिए जारी दिशानिर्देश वापस लिए क्योकि इस हेतु केवल ncert ही सक्षम है,परंतु ये समझ से बाहर है कि केंद्रीय विद्यालय संगठन मुख्यालय द्वारा इसे इस वर्ष यहाँ जारी रखने का पत्र क्यो जारी किया गया।
क्या ये कानून सम्मत और बच्चों के हितों पर कुठाराघात नही है??विचार करें।
3.वरिष्ठ कार्यालय सहायकों की सूची-केंद्रीय विद्यालय संगठन में कनिष्ठ कार्यालय सहायकों की परीक्षा आगामी दिनों ने होनी है,उससे पहले ये सूची जारी होना एक स्वागत योग्य कदम है और इससे खाली स्थान और पदों की कुल संख्या सुनिश्चित समय से हो जाएगी।
आशा है कि शिक्षकों के मामले में भी ऐसा ही किया जाएगा, हमें नॉन टीचिंग स्टाफ एसोसिएशन के अपने सदस्यों हेतु किये जा रहे प्रयासों से सीखने की आवस्यकता है।
आंचलिक प्रशिक्षण केंद्रों में अध्यन,अध्यापन और सुविधायों के ऊपर निश्चित रूप से सोचने की आवश्यकता है,इस हेतु एक समग्र लेख आने वाले हफ़्तों में पूरे तथ्यो और सबूत के साथ लिखूंगा।
आज कुमार विश्वास जी के ऊपर लिखी एक कविता के साथ इस अंक का समापन,इस आशा के साथ कि आपको ये पसंद आएगा।
"वह मंचो का शिखर पुरुष है/ वंशज भूषण की परिपाटी का
उसको नियम ज्ञात नही था/ सियासी हल्दीघाटी का
यहाँ जय चन्द बिठाये जाते/ सत्ता के सर आँखों पर
राणा यहाँ भटकते रहते /जीवन भर वनवासों पर
उठो कुमार कुरुक्षेत्र में /शब्दों से शंखनाद कर दो
दुर्योधन शकुनि दु;शासन / का छल कपट नाश कर दो
तुम तो माँ सरस्वती के वंशज/दिनकर कुल की थाती हो
सारा देश जानता है/तुम केवल भारतवादी हो
तुम भी गजब सोचते हो/ कोई अंगारे को आसन देगा
अन्धकार क्यूँ बोलो/सूरज को सिंहासन देगा
अच्छा हुआ नही तै शकुनि / चाल विदुर से चलवाता
जाने अनजाने में जाने तुमपर/कितने अपयश लगवाता
सुयश तुम्हारा बहुत श्रेष्ठ है/गद्दी से सिंहासन से
पूरा देश मानता है/तुमको अपने पूरे मन से
हे कुमार तुम इन्कलाब के/ सबसे बड़े पुरोधा हो
चक्रव्यूह में फंसे हो लेकिन /अभिमन्यु से योद्धा हो
भारत की तरुणाई की तुम/ कविता है तुम अक्षर हो
धूर्त दलालोँ के मुँह पर/ पौरुष का हस्ताक्षर हो।"
सदा की तरह आपके सुझावों, और विचारों का स्वागत और इंतेजार रहेगा।
आपका
उमाकान्त त्रिपाठी।