प्रिय मित्रों,
केंद्रीय विद्यालय गैर शिक्षक संघ के महासचिव का दिनाँक 31/01/2018 का लिखा केंद्रीय विद्यालय संगठन के पुस्तकालय अध्यक्षों पर पत्र हेतु वे साधुवाद के पात्र है कि किसी ने तो इनकी समस्या के तरफ ध्यान तो दिया।वरना विद्यालय में पुस्तकालय अध्यक्षों की वास्तविक स्थिति किसी से छुपी नही रही है।
विद्यालय के तमाम कार्य मे वे स्टेपनी की तरह प्रयुक्त होते है जिसे स्काउट गाइड से लेकर एग्जामिनेशन ड्यूटी और न जाने क्या क्या कार्य पर जब उनके हितों की बात आती है तो संख्या बल कम होने के कारण वे दया के पात्र बन जाते है जिन्हें न कोई प्रमोशन के साधन है और अब तो 7वे वेतन आयोग के बाद सीनियर स्केल और सिलेक्शन स्केल में मिलने वाला लाभ भी जाता रहा।
अतः ये नितांत आवश्यक है कि वस्तुस्थिति में बदलाव हो।
निसंदेह वर्तमान स्थिति ज्यादा समय तक बनी नही रह सकती और रहनी भी नही चाहिए।
नॉन टीचिंग में आने से फायदे यथा MACP का मिलना और नुकसान दोनों है।
आशा है कि हम इस मुद्दे पर खुले दिल से सार्थक बहस कर नतीजे पर पहुँचेंगे।
अगर नॉन टीचिंग एसोसिएशन इस हेतु कोई प्रयाश करता है तो निश्चित रूप से मैं इसके समर्थन में हूँ और सहभागी।
आपका
उमाकान्त त्रिपाठी।