प्रिय मित्रों,
आज सायंकाल दिनाँक 04/02/2018 को जब आपसे मिल रहा हूँ तो कुछ बिंदु आपसी संवाद हेतु।
1.केंद्रीय विद्यालय और नवोदय विद्यालयों की स्थिति-श्री अनिल स्वरूप जी जो अखिल भारतीय केंद्रीय सेवा(IAS)के वरिष्ठ पदाधिकारी और वरिष्ठ नौकर शाह है उन्हें मैं ट्विटर पर फॉलो करता हूँ,उनकी पोस्टो में एक बात जो प्रसंशा और स्वागत योग्य है वह ये की रोज वे अपने किसी साथी के द्वारा देश के विभिन्न जिलों,प्रदेशों में उल्लेखनीय कार्यो का वर्णन करते है ,क्या हम इससे कुछ सिख सकते है??
आज के पोस्ट में उन्होंने नवोदय और केंद्रीय विद्यालयों की प्रशंसा की उनके उपलब्धियो हेतु,क्या जिस प्रकार इसका दोहन हो रहा है,ये आगे भी ऐसा ही रहेगा??
2.पुस्तकालय अध्यक्षों को प्रोन्नत्ति या नॉन टीचिंग -कल एक संघ के मुखिया ने इस ज्वलंत मुद्दे पर अपनी बात रखी,इस पर सार्थक और तार्किक बहस होनी ही चाहिए।
सिर्फ MACP के कारण पुस्तकालय अध्यक्षों के वेतन में प्रतिमाह 5 से 6 हजार का इजाफा हो जाएगा।
क्या हम सभी अन्य श्रेणी के शिक्षकों को जिन्हें केंद्रीय विद्यालय संगठन न प्रमोशन देता है और अब सीनियर और सिलेक्शन स्केल में कोई फायदा न रहा उन्हें नॉन टीचिंग में रख कर टीचिंग अलाउंस के तर्ज पर MACP को देने की मांग कर सकते है??,विचार करें।
3.ब्लॉग-विगत दो वर्षों से निरंतर सोशल मीडिया पर अपने विचार रख रहा हूँ,कुछ लोगो को बहुत पसंद आते है और तो कुछ लोग इसे समय की बर्बादी मानते है।कुछ को भाषा की समस्या है।एक और समस्या डाक्यूमेंट्स,सर्कुलर और माननीय न्यायालय के निर्णयों को लेकर है, आज कल सेवा कालीन प्रशिक्षण शिविर में विचार इसे एक जगह समाहित,एकत्रित और सभी को सुलभ बनाने की आयी।
एक कोशिश की है,आज के पोस्ट से।
अंत मे श्री भूपेंद्र जैसवाल की एक कविया जो देश की दशा और दशा पर है,इस आशा से की आपको पसंद आएगी।
"देख वतन का हाल
बहती है अश्क की धार
जनता को ही लुट रही
जनता की चुनी सरकार
अपराधियों से भरी संसद
कानून दिखती लाचार
रिश्वत की लत लगी सभी को
हर ओर फैला भ्रष्टाचार
चोर पुलिस है भाई भाई
आम जनता सहती अत्याचार
ईमानदारों का मुँह है बंद
बेईमानों को मिलता पुरुस्कार
जिसने भरा सबका पेट
वो सहता महंगाई की मार
अमीरों के साथ है दुनियां
गरीब हो गए है निराधार
छीन किसानों की जमीनें
हो गए कई मालदार
जिसने की आवाज़ बुलंद
पहुँच जाता है वो कारागार।"
सदा की तरह आपके विचारों और सुझावों का स्वागत और इंतेजार रहेगा।
आपका
उमाकान्त त्रिपाठी।