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शिक्षक समस्याएँ
1. मेडिकल सुविधाएं*** 2. CGHS*** 3. MACP*** 4. सातवें वेतन आयोग का एरियर*** 5. प्रमोशन*** 6.अपग्रेडेड पे स्केल ***7.RTE का पूर्ण अनुपालन ***8.रिक्त स्थानों की जल्द से जल्द भरती ***9.प्राथमिक शिक्षकों को ४६०० ग्रेड पे ***10.अन्य श्रेणी के शिक्षकों को भी प्रोन्नति के अवसर ***11.संगीत शिक्षकों को TGT ग्रेड ***12.सेवानिवृत्त कर्मचारियों को ७ वेतन मान का लाभ और समय से वेतन ***13.प्रोजेक्ट के विद्यालयो में कार्यरत कर्मचारियों को समय से वेतन 14.आश्रित परिवारों का त्वरित समायोजन ***
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Sunday, March 25, 2018

संवाद

प्रिय मित्रों,
आज दिनाँक 25 मार्च 2018 को आपसे मिल रहा हूँ तो कुछ बिंदु आपसी संवाद हेतु,

1. *सबको देखो फिर चुनो*--आज कल एयरटेल का ये  विज्ञापन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया पर खूब छाया हुआ है।मेरा भी यही मानना है कि सबको मौका मिलना चाहिए।लोकतंत्र है, आप जिसे चाहें उसे आजमाए,चुने या नकारे।बस इतनी विनती की आड़ रखें, एकमात्र केंद्रीय विद्यालय संगठन ही है जहाँ 40 प्रतिसत कर्मचारी किसी भी संघ या समूह के सदस्य नही है,99 प्रतिसत ने कभी किसी संघर्ष, धरने और प्रदर्शन छोड़िये ब्लैक भी छोड़िये, प्राचार्य के कमरे में जाकर अपनी जायज बात कहने का साहस नही है।

अतः ये तो मैं सार्वजनिक रूप से स्वीकार करता हूँ कि हम आप की अपेक्षायो पर खरे नही उतरे है पर इसका कारण सिर्फ संघ और उसके पदाधिकारी ही है,ये मैं कभी नही मानता,इसके जिम्मेदार हम सब है।अगर अच्छे लोग और जनसहभागिता नही होगी तो अच्छे दिन का तो पता नही,बुरे दिन जरूर आएंगे।

2. *सेवानीवरित्त साथियो को 7वे वेतनमान के अनुसार पेंशन-* निश्चित रूप से ये गंभीर समस्या है,इसमे सेवारत लोगो का जितना साथ मिलना चाहिए था,वह नही मिल रहा,मैं अवस्य मानता हूँ कि हमे नियम,कानून,मान और मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए,पर अपनी जायज बातों को न रख पाना और इसमे उदाशीनता सबको भारी पड़ेगी।मेडिकल,MACP, बोनस की तरह अगर भविष्य में पेंशन के भी लाले पड़ जाए तो कोई अचंभा मत करिएगा।अतः अभी भी समय है,संभल जाइए, हमारी 20 साल की सर्विस बची है, अगर आपको चिंता नही तो हम ही क्यो भगत सिंह बन अपना सब लूटा दे।

3. *अपग्रेडेड पे स्केल और मेडिकल* ,-ये सार्वजनिक रूप से मानने और स्वीकार करने में मुझे कोई परेशानी नही है कि आज के समय मे MACP का केस सेवारत कर्मियों हेतु  जिसका सार्वजनिक रूप से सबको पता है,इस बारे में संघ के रूप में  केवल KVPSS ने किया हुआ है,CGHS का केस,PRT ग्रेड पे की तरह निश्चित रूप से केवल सुरेश कुमार शर्मा जी और उनके साथियों ने किया है,अगर उन्हें इसमे सफलता मिलती है,तो लाभ सबको होगा,इस हेतु उनको सुभकामनाये और आभार।

हम ने भी हाल में ही बोनस पर केस किया है,पर ऑटोनोमस बॉडीज नॉन प्रोडक्टिव यूनिट है और इन सभी को बोनस न देने का फैसला भारत सरकार का नीतिगत फैसला है,इसको माननीय न्यायालय बदल देगा,मुझे इसमे शंका है और दुविधा भी।

हम एक बड़े परिवार का हिस्सा है,इसमे कई बार आपके हित की अनदेखी भी होती है और कई बार हक़ भी मारा जाता है उदाहरण के लिए लाइब्रेरियन को एकमात्र 2007 से पे स्टेप उप हुआ,अपग्रेड का केस माननीय सुप्रीम कोर्ट से जितने के बाद भी हम इस हेतु किसी भी संघ को इसे माननीय न्यायालय में ले जाने को मना नही पाए है,कई विद्यालयों में साथियों को महीनों के वेतन तक नही मिला है।

पर क्या इस हेतु हम सब अलग होकर एकल परिवार बना ले या संयुक्त परिवार में बने रहे, अपनी बात को रखें और इस हेतु प्रयाश जारी रखें ,या एकला चलो की राह पकड़ ले,फैसला आपको करना है।

मेरा तो बस माननीय अटल बिहारी वाजपेयी जी की उस पंक्तियों पर विस्वाश है कि

" *अंधेरा छटेगा, सूरज निकलेगा और कमल एकएक दिन जरूर खिलेगा।"*

मेरा तो बस इतना ही मानना है कि जिस परिवार से जुड़ा हूँ उससे जुड़े रहूँगा,सुख में भी दुख में भी,अपनी बात रखूंगा,मानना न मानना जो शीर्ष में है उनकी जिम्मेदारी।

सामूहिक निर्णय जो भी है,चाहे सही या गलत,उसकी मेरी भी उतनी ही जिम्मेदारी।

*_आज रामनवमी है,आप सभी को इस हेतु सुभकामनाये,आपका और आपके परिवार में सुख और समृद्धि आए, इतनी ही प्रभु से कामना है।*_

आपका
उमाकान्त त्रिपाठी ।

Tuesday, March 20, 2018

CGHS Facility to all retired employee residing in Delhi NCR

शत शत नमन उनको जो माननीय न्यायालय की शरण मे ग

Friday, March 16, 2018

संवाद

प्रिय मित्रों,
आज सायंकाल दिनाँक 16 मार्च 2018 मिल रहा हूँ तो कुछ बिंदु आपसी संवाद हेतु।

1.CGHS-आज पूरे दिन CGHS के केस और इस पर केंद्रीय विद्यालय संगठन के जवाब की चर्चा सोशल मीडिया पर छाई रही।एक वरिष्ठ अधिकारी के माध्यम से कहा गया कि केंद्रीय विद्यालय संगठन ने जवाब माननीय न्यायालय में जमा कर दिया है,पॉजिटिव है,सब अच्छा है।
आपको याद है कुछ महीनों पहले ऐसा ही भ्रम बोनस को लेकर भी फैलाया गया,क्या हुआ??सबको पता है।
विचार करने वाली बात है कि CGHS को केंद्रीय विद्यालय संगठन ने नही स्वास्थ मंत्रालय ने सीमित संसाधन का हवाला देते हुए मना किया है,इस हेतु संसद के पटल पर सरकार ने कई बार जवाब दिया है।
जब हम कर सकते थे तब सोए रहे और अब ये सुगुफा,ऐन सदस्यता से पहले ,किसको वेवकूफ बना रहे है।
कुछ महीनों पहले की बात है बड़े बड़े दावे मेडिक्लेयम पालिसी और उसके बखान को लेकर किये जा रहे थे ,उसका एक मीटिंग के अलावा दो सालों में क्या हुआ??
समस्या ये है कि हमे पता ही नही है कि हम चाहते क्या है??,न विचार और न विमर्श??,कुछ लोग अपनी चीर निद्रा से उठ कर जाते है और एक सगुफा छोड़ देते है।
विचार करें
1.अगर CGHS चाहिए था तो केस किसने,क्यो और कब किया, इसका उत्तर कौन देगा??
2 CGHS चाहिए था तो इस हेतु मीटिंग और इसने सुझाव कसने और क्यो दिए??
3.अब उस केस के बाद स मेडिकल पालिसी का क्या होगा??
मित्रो इसका हाल भी MACP की तरह ही होने वाला है,जिसमे हमे पता नही हम चाहते क्या है??कभी कोई माननीय सिलेक्शन स्केल हेतु पत्र चला देते है और फिर कोई MACP हेतु केस कर देता है??
अब सोचिये कहीं और ऐसा विरोधाभास देखा है।ये तो ऐसा है कि हम हवा में तीर चला रहे है और प्रार्थना की ये नही तो वो मिल जाये।
ईस्वर सद्बुध्दि दे।

2.रिक्रूटमेंट रूल्स हेतु समिति-कितना दुखद है कि एक भी पत्र अन्य श्रेणी के शिक्षकों के प्रमोशन और उनके कार्य के ऊपर इसमे नही लिखा गया,मीटिंग के जो बिंदु सोशल मीडिया में आये है,उससे तो ये ही लगता है।अगर अन्य श्रेणी के शिक्षकों की मांग को संघ ही नही रखेगा और उनके साथ सौतेला व्यवहार करेगा तो कौन सुनेगा।
ये तो सिर्फ इतनी विनती कर रहे है कि भारत सरकार के नियानानुसार जो लोग अहर्ता ओरी करते है उन्हें प्राचार्य और उओ प्राचार्य के परीक्षा में बैठने दिया जाए,जी योग्य होंगे निकाल लेंगे??इसमे क्या दिक्कत है,ये कोई कोटा तो मांग नही रहे??,फिर ये बेरुखी क्यो??
दूसरा इनके कार्यो और बोझ पर भी कमेटी बने और स्वतंत्र रूप से अध्ययन करें??क्या दिक्कत है।

हा शिक्षकों में भी TGT साइंस,TGT संस्कृत, पीजीटी कंप्यूटर,कॉमर्स और तीन सेक्शन में अंग्रेजी के साथी 36 पीरियड और छात्रों का दबाव झेल रहे है,क्या कोई इस हेतु कुछ बोलेगा??
अगर नही तो क्यो नही इस पर कोई विचार अब तक किया गया??

3.केंद्रीय विद्यालय जगिरोड-इस विद्यालय में पिछले कई महीनों से साथियो को वेतन नही मिल रहा,पर कोई भी राष्ट्रीय नेता वहाँ जाने की आज तक कोशिश भी नही किया क्यो??
ये हमारे ही साथी है,आज इन ओर संकट है,कल हम पर होगा,वे अकेले भूखे मरने को छोड़ दिये गए है,याद रखिये,मार्टिन लूथर किंग ने कहा था कहीं भी हो रहा अन्याय ,हर किसी के लिए खतरा है।
इनके बात और हितों को नजर अंदाज मत करे,जरूरत पड़े तो धरना प्रदर्शन जो ये अकेले कर रहे है,उसमे इनका न केवल साथ दीजिये बल्कि इसे दिल्ली में लेकर आईये।
कोई भी लोकतांत्रिक शासन इस मानवीय त्रास्दी में आपके विरुद्ध नही बल्कि साथ होगा।

अंत मे बस इतनी सी विनती कुमार विश्वास के शब्दों में।

" *हमने कहा अभी मत बदलो, दुनिया की आशाएँ हम हैं !
वे बोले अब तो सत्ता की वरदायी भाषाएँ हम है !
हमने कहा व्यर्थ मत बोलो, गूँगों की भाषाएँ हम हैं !
वे बोले बस शोर मचाओ, इसी शोर से आए हम हैं !"

सदा की तरह आपके सुझावों और विचारों का इंतेजार और स्वागत रहेगा।

आपका

उमाकान्त त्रिपाठी।