सेवानीवरित्त शिक्षक साथियों द्वारा माननीय न्यायालय के शरण मे प्रतिवेदन,कल के धरना प्रदर्शन के बाद।
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Wednesday, April 18, 2018
Wednesday, March 14, 2018
संवाद
प्रिय मित्रों,
आज सायंकाल दिनाँक 14/03/2018 को आपसे मिल रहा हूँ तो कुछ बिंदु आपसी संवाद हेतु।
1.7 सीपीसी का एरियर और सौतेला व्यवहार-कल एरियर की खबर पर उसके साथ केंद्रीय विद्यालय संगठन के साथ सरकार का सौतेला व्यवहार,सच मे दुखदायी और पीड़ाजनक है।बहुत सारे शिक्षकों ने सोशल मीडिया पर खूब भड़ास निकाली और और निकाल रहे है,की दोनों यूनियन के लोग सिर्फ अपने फायदे और स्वार्थ के लिए चिपके पढे हुए है।ये लोग नवोदय के साथियों से सीखना चाहिए।एक साथी ने 25 केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्यों पर ही उंगली उठायी।
मेरा निवेदन इस पर इस प्रकार है।
1.हम निश्चित रूप से असफल हुए है और ईमानदारी से कहूँ तो होंगे आगे भी,कारण ये है कि हम सब भगत सिंह चाहते है पर अपने घर मे नही दूसरे के।
2.कितने साथी अगर यूनियन के पदाधिकारियों के साथ अन्याय जो कि हमेशा होता है,उनके कहने या उनके संकट की घड़ी में साथ देंगे ???कजोड़िया जी याद है अगर नही तो गूगल कर लीजिए,फेसबुक पर चले जाइये ,सैकड़ो पन्ने मिल जाएंगे,कितनों ने उनका साथ दिया ।आज वे नौकरी से निकल दिए गए है,क्यो??
3.हम जब आपके विद्यालयों में सदस्य बनने की गुजारिश लेकर आते है तो कितने लोग स्वयं आगे बढ़कर इसमे आते है।विचार करे,ऐसा लगता है कि हम भीख मांग रहे है या हमारे साथी हमे 120 रुपये का हफ्ता दे रहे पूरे साल के सुरक्षा के बदले।
4.मित्रो आपको नेतृत्व वैसा ही मिलेगा जैसे आप होंगे,अगर आप स्वार्थी होंगे तो आपके पदाधिकारी भी ऐसा ही होंगे,जो नही होंगे उन्हें परिस्थितियों ने बना दिया है या बना देगी।हम सब साधारण परिवार से अपने परिवार के लिए नौकरी करते है,कोई यहाँ धर्म कर्म करने नही आया।पहले अपनी और अपने परिवार की सुरक्षा उसके बाद जो बन पाया वही एक समझदार आदमी करेगा।
5.पहले भी कहा है ,हमारे प्राचार्य से लेकर ऊपर तक के अधिकारी सिर्फ माननीय आयुक्त और अतिरिक्त आयुक्त प्रशाशन को छोड़ कर एक ही नाव में सवार है और सबके हेतु एक ही नियम और प्रभाव है,पर ये जैसे ही अधिकारी बन जाते है अपने को खुदा मान लेते है और शिक्षकों को गुलाम।एक वरिष्ठ साथी ने हाल में ही फेसबुक पर लिखा कि जो पेंशनर के लिए liason ऑफ़सर थे वे अब रेटिरमेंट के बाद अपने पेंशन हेतु भटक रहे है।कितना विचित्र पर संयोग है।
6.रही बात नेताओं और पदाधिकारियों की,उन्होंने भी सच्चाई को समझ और इसे नियति मांग लिया है।हमारे दो एसोसिएशन में दुर्भाग्य से एक मे नेताओं की कमी नही है पर कोई कार्यकर्ता नही बनना चाहता और दूसरे में कार्यकर्ता है पर नेताओं का सर्वथा अभाव ।
सबसे बड़ी बात एक दूसरे पर अविस्वाश और एक भय की अगर कोई कार्य किया तो केंद्रीय विद्यालय संगठन तो एक मौका ढूढ़ रहा है,ठिकाने लगाने को,उस घड़ी में कोई साथ नही देगा,अब सब कजोड़िया जी जी तरह शहीद होने के लिए कफन तो बांध नही लेंगे।
अंत मे आने वाले दिन और अंधकारमय होंगे,समय और हालात की मांग है कि हम एक साथ विचार करे और अपनी कमियों और कमजोरियों को दूर करे।
संगठन में ही शक्ति है और हम अपने आपसी मतभेद भूला कर,इस पर पर पा सकते है।अगर दशको से धुर विरोधी सपा, बसपा एक साथ हो सकते है तो हम क्यो नही,इसका क्या परिणाम हुआ आप सभी टीवी पर आज देख ही रहे है,भाजपा का विजय रथ रुक गया।
आशा और विश्वास की हम एक होंगे।
सदा की तरह आपके विचारों और सुझावों का स्वागत और इंतेजार रहेगा।
विस्तृत ब्लॉग पर कुछ और जानकारी और तथ्यो के साथ।
आपका
उमाकान्त त्रिपाठी।
Tuesday, March 13, 2018
नवोदय विद्यालय समिति के साथियों के द्वारा किया गया ब्लैक बैज धरना प्रदर्शन|
संवाद
प्रिय मित्रों,
आज सायंकाल दिनाँक 13/03/2018 को आपसे मिल रहा हूँ तो कुछ बिंदु आपसी संवाद हेतु।
1.7वे वेतनमान के एरियर का भुगतान-गत दिनों जब माननीय सांसद यादव जी ने लाइब्रेरियन के मुद्दे को संसद में प्रश्नकाल में उठाया था तो माननीय मंत्री जी ने संसद को बताया था कि 300.53 करोड़ केंद्रीय विद्यालय संगठन को वेतन और भत्ते के भुगतान हेतु दिए गए है,जिससे सेवा में और रिटायर हुए अधिकांश कर्मचारियों के बकाए का भुगतान हो जाएगा।
पर वास्तव में मिला क्या??100 प्रतिसत की जगह 50 वो भी बिना भत्ते के,बकाया सभी काट के।
इससे अच्छे तो नवोदय विद्यालय के साथी है जिनका पूरा 100 प्रतिसत भुगतान हो गया है।
50 प्रतिसत तो उन्हें पहले ही मिल चुका है।
ये स्थिति तब जबकि हमारे यहाँ तीन तीन मान्यता प्राप्त एसोसिएशन है और बड़े बड़े नेता।
नवोदय में तो एक भी मान्यता प्राप्त एसोसिएशन भी नही है।इस पर भी हम अपनी पीठ थपाये तो किसको मूर्ख बना रहे है।
हम बोनस,MACP, मेडिकल,अपग्रेडेड पे, ये सब छोड़िये एक छुट्टी तक नही बदलवाने में असफल हुई है।
हा इसका दोष एसोसिएशन पर देकर कोई बाख नही सकता।
किन परिश्थितियो में संघ चल रहे है ,इसमे पदों पर बैठे लोग ही जानते है,अधिकारी तो वैसे ही नही चाहते, हमारे साथी जो विद्यालयों में बैठे है,प्राचार्य को खुश करने हेतु,apar के नंबर,अवार्ड हेतु कभी कोई भी कंप्लेंट करने और साथ देने को तैयार है।
अतः समय है एक साथ आए आपसी मतभेद भुला कर एक हो वरना आगे आने वाला दिन और भी अंधियारा लाएगा।
ईस्वर सद्बुध्दि दे।
कुछ पत्र और फॉर्म ब्लॉग पर अपलोड किए है,आशा है कि ये आपके काम आएंगे और जानकारी में बृद्धि करेंगे।
सदा की तरह आपके विचारों का इंतेजार और स्वागत रहेगा।
उमाकान्त त्रिपाठी।